चार अरब देशों ने इस हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव को कम करने के लिए सक्रिय रूप से कूटनीति की। इन देशों को आशंका थी कि अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र असर पड़ सकता था। एक खाड़ी देश के अधिकारी ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
सऊदी अरब, कतर, ओमान और मिस्र ने अमेरिका और ईरान दोनों पक्षों से बातचीत की। यह प्रयास करीब 48 घंटे तक चला। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि फिलहाल ईरान पर हमला नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान में हिंसा की घटनाएं कुछ कम हुई हैं।
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अधिकारी के मुताबिक, इन चारों देशों ने अमेरिका को बताया कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो इसके गंभीर सुरक्षा और आर्थिक परिणाम होंगे। इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा और अंत में अमेरिका भी इससे प्रभावित होगा। अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर रॉयटर्स को यह जानकारी दी।
इन देशों ने ईरान से भी कहा कि अगर उसने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला किया, तो इससे क्षेत्र के अन्य देशों के साथ उसके संबंध बिगड़ सकते हैं। सऊदी अरब, कतर, ओमान और मिस्र के सरकारी प्रवक्ताओं ने इस मुद्दे पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भी इस मामले पर टिप्पणी नहीं की। अधिकारी ने कहा कि यूएई इस कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा नहीं था।
इस बीच, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट में बताया कि सऊदी अरब, कतर और ओमान ने अमेरिका से ईरान पर हमला न करने की अपील की थी। अधिकारी ने बताया कि इन कूटनीतिक प्रयासों का मकसद बयानबाजी को कम करना और किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचना था, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती थी। उन्होंने कहा कि इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत की संभावना भी बन सकती है।
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ओमान और कतर पहले भी ईरान और पश्चिमी देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते रहे हैं। वहीं, सऊदी अरब और मिस्र के ईरान के साथ संबंध लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि, ईरान और सऊदी अरब के बीच दशकों से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता के बाद दोनों देशों ने 2023 में संबंध सुधारने पर सहमति जताई थी। सऊदी अरब अब अपनी आर्थिक योजनाओं पर ध्यान देना चाहता है।
खाड़ी देशों को चिंता है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ा, तो उनके यहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने और तेल-गैस से जुड़े अहम प्रतिष्ठान निशाने पर आ सकते हैं। इससे पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। सऊदी अरब और कतर के ट्रंप प्रशासन के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। कतर और मिस्र गाजा में इस्राइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध को लेकर अमेरिका के साथ मध्यस्थता की भूमिका में भी शामिल रहे हैं।