देशभर के मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर की 18,000 से अधिक सीटें खाली रहने के कारण राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान बोर्ड (एनबीईएमएस) ने नीट पीजी-2025 प्रवेश के लिए पर्सेंटाइल कटऑफ में बदलाव किया है। आरक्षित वर्ग के लिए कटऑफ पर्सेंटाइल 40 से घटाकर शून्य, जबकि सामान्य वर्ग व इंडब्ल्यूएस के लिए 50 से घटाकर सात पसेंटाइल किया गया है। सामान्य वर्ग के दिव्यांगों के लिए यह 45 से घटाकर 5 फीसदी है।
बोर्ड ने यह निर्णय नीट पीजी दाखिले के लिए दूसरे दौर की काउंसलिंग पूरी होने के बाद किया है। बदलाव के बाद खास यह है कि आरक्षित श्रेणी में पहले 235 अंक वाले पात्र थे, अब माइनस 40 अंक पाने वाले भी दाखिला पा सकेंगे। यानी शून्य से 40 अंक नीचे वाले उम्मीदवार भी स्नातकोत्तर दाखिले के पात्र होंगे। सामान्य वर्ग के जिन उम्मीदवारों को 103 अंक मिले होंगे, वे दाखिला पाने के पात्र होंगे। पहले यह 276 था। इसी तरह, सामान्य दिव्यांगों के लिए पहले 255 अंक जरूरी थे। अब 90 अंक लाने वाले भी दाखिले के पात्र होंगे।
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योग्यता और पसंद के आधार पर ही सीटें
- मेडिकल स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में प्रवेश नीट पीजी के माध्यम से ही दिया जाएगा।
- प्रवेश प्रक्रिया राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातकोत्तर) के नियमों के अनुसार होगी।
- एनबीईएमएस द्वारा स्पष्ट किया गया है कि सीटों का आवंटन केवल काउंसलिंग (परामर्श) प्रक्रिया के जरिए होगा।
- किसी भी तरह का प्रत्यक्ष (डायरेक्ट) या विवेकाधीन (डिस्क्रेशनरी) प्रवेश मान्य नहीं होगा।
- सभी सीटों का आवंटन पहले की तरह योग्यता (मेरिट) के आधार पर किया जाएगा।
- उम्मीदवार की पसंद (चॉइस फिलिंग) को भी सीट आवंटन में ध्यान में रखा जाएगा।
- प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखी जाएगी।
- शैक्षणिक मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
डॉक्टर बोले- यह मानकों का पतन
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशंस के मुख्य संरक्षक डॉ. रोहन कृष्णन ने कहा, कमाल की बात है कि परीक्षा में कोई प्रश्न हल नहीं कर पाने के बाद शून्य पाने वाले और कई प्रश्न गलत कर माइनस अंक पाने वाले प्रत्याशी देश में विशेषज्ञ चिकित्सक बनने के पात्र घोषित कर दिए गए हैं। कृष्णन ने कहा, ये सभी सर्जरी में भाग लेने के योग्य होंगे और देश में डॉक्टरों की प्रैक्टिस कर पाएंगे। यह बहुत दुखद है। कटऑफ को शून्य तक कम कर दिया जाए, तो राष्ट्रीय योग्यता परीक्षा का क्या मकसद है। यह मानकों का पतन है।
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