रोजगार, विनिर्माण और एमएसएमई पर फोकस
बजट में रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देने की उम्मीद है। इसमें विनिर्माण, कौशल विकास और अपरेंटिस कार्यक्रमों से जुड़े प्रोत्साहन शामिल हो सकते हैं। उच्च इनपुट लागत से लाभ में कमी का सामना कर रहे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समर्थन देने वाली योजनाओं के लिए आवंटन में वृद्धि या ऋण गारंटी सहायता दी जा सकती है।
इसके साथ ही विनिर्माण क्षमता, निर्यात और रोजगार पर उत्पादन-प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं में भी सुधार संभव है। इसके अलावा हरित उर्जा के क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, बैटरी भंडारण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए समर्थन बढ़ सकता है। स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के उपाय भी हो सकते हैं।
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रिकॉर्ड दर्ज करेंगी सीतारमण
इन सभी चिजों के बीच सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौ बार बजट पेश करने वाली देश की पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने 10 बार और पी चिदंबरम ने 9 बार बजट पेश किया, लेकिन दोनों नेताओं ने ही अलग-अलग कार्यकालों में ऐसा किया है। इसलिए भारत के इतिहास में यह पहली बार है जब कोई वित्त मंत्री लगातार नौ बार बजट पेश करेगा।
चुनावी राज्यों पर नजर
खर्च में कटौती की आशंका के बावजूद वित्त मंत्री से खर्च कम करने की उम्मीद नहीं है। चुनाव वाले राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम के लिए नए उपाय शामिल हो सकते हैं। कुछ योजनाओं को नए रूप में पेश किया जा सकता है। ऐसा करते समय कल्याणकारी व्यय और राजकोषीय विवेक के बीच संतुलन बनाना नाजुक कार्य होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अधिक समर्थन और लक्षित सब्सिडी की मांगों को देखते हुए यह अहम है।
पूंजीगत व्यय में वृद्धि की संभावना
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में, सरकार ने निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए सड़कों, रेलवे, रक्षा विनिर्माण, शहरी अवसंरचना और रसद पर खर्च में भारी वृद्धि की है। इस वर्ष भी अर्थशास्त्रियों को पूंजीगत व्यय में एक और महत्वपूर्ण वृद्धि की उम्मीद है। रेलवे, नवीकरणीय ऊर्जा, विद्युत पारेषण, रक्षा और शहरी परिवहन पर प्राथमिकता रह सकती है। साथ ही बड़ी रियायतों के बजाय कर स्थिरता पर जोर देते हुए सरकार ने प्रत्यक्ष करों पर स्थिरता और पूर्वानुमान को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है। आयकर में मामूली कमी होने की उम्मीद है, ताकि मध्यम वर्ग पर बोझ कम करके उपभोग को बढ़ावा मिले।