मालदा मामला:’जब अन्याय कानून बन जाए, तो विरोध आखिरी रास्ता’; माकपा नेता मोहम्मद सलीम ने हिंसा का किया बचाव – ‘when Injustice Becomes Law, Resistance Is Only Way’ Md Salim Defends Malda Gherao


पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हिंसा को लेकर सियासत तेज हो गई है। माकपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सलीम ने इस घटना का बचाव करते हुए कहा कि जब अन्याय कानून बन जाता है, तो विरोध ही एकमात्र रास्ता बचता है।

सलीम ने कहा कि यह घटना केंद्र और राज्य सरकार की विफलताओं का परिणाम है, खासकर मतदाता सूची से नाम हटाने के विवाद को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है। उनके मुताबिक, जब लोगों के नागरिक और वोटिंग अधिकार प्रभावित होते हैं, तो ऐसे आंदोलन स्वाभाविक हो जाते हैं।

मालदा के मोथाबाड़ी इलाके में बुधवार को हालात उस समय बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारी भीड़ ने सड़क जाम, तोड़फोड़ और पुलिस पर हमला किया। इस दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को बीडीओ कार्यालय में बंधक बना लिया गया, जबकि एक अधिकारी को वाहन में करीब नौ घंटे तक रोके रखा गया।

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अब तक 35 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी

इस मामले में अब तक 35 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच की जिम्मेदारी सीआईडी के साथ-साथ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को भी सौंपी गई है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सक्रिय हुई है। सलीम ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक तंत्र और चुनाव आयोग जनता को न्याय देने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर पड़ती हैं, तो शासन पुलिस राज्य की तरह व्यवहार करने लगता है, जिससे जनता का विरोध बढ़ना तय है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि विवादित मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया (SIR) गरीब, अल्पसंख्यक और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के खिलाफ एक तरह का अभियान है। सलीम के अनुसार, बिना स्पष्ट कारणों के लोगों के नाम हटाए गए, जिससे समाज के कई वर्ग प्रभावित हुए।



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