राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल:कांग्रेस ने ओडिशा के 8 विधायक कर्नाटक भेजे, क्रॉस वोटिंग का सता रहा डर – Rajya Sabha Elections Congress Sends 8 Odisha Mlas To Karnataka Amid Fears Of Cross-voting


देशभर की सियासत में राज्यसभा चुनाव को लेकर गर्माहट बढ़ गया है। दूसरी ओर इस चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी भी तेज कर दी है। इसी बीच ओडिशा में 16 मार्च को होने वाले राजसभा चुनाव से पहले विपक्षी कांग्रेस ने अपने 14 में से 8 विधायकों को कर्नाटक भेज दिया है। यह कदम क्रॉस वोटिंग और भाजपा के प्रभाव से बचाने के लिए उठाया गया है। इन 8 विधायकों में मुख्य व्हिप सीएस राजेन एक्का भी शामिल हैं। इस बात की जानकारी कांग्रेस के नेताओं ने शुक्रवार को दी।

जानकारी के अनुसार कांग्रेस के विधायकों को बंगलूरू के एक रिसॉर्ट में रखा गया है। कांग्रेस विधायकों के नेता रमा चंद्र कदम ने कहा कि हमारे विधायकों को भाजपा के प्रलोभन और दबाव से बचाने के लिए बंगलूरू भेजा गया है। हमारे विधायक एकजुट रहेंगे। इन विधायकों को सोमवार को भुवनेश्वर लौटकर सीधे विधानसभा में वोट डालना है। इससे पहले कांग्रेस ने सभी 14 विधायकों को भुवनेश्वर बुलाया था। बाकी 6 विधायक अभी भुवनेश्वर में बजट सत्र में शामिल हैं।

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ओडिशा में राज्यसभा सीटों का गणित समझिए

बता दें कि इस चुनाव में ओडिशा के चार राजसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। बीजेडी के पास एक सीट लगभग तय है, जबकि भाजपा के पास दो सीटें पक्की हैं। चौथी सीट के लिए दोनों पार्टियों के पास आवश्यक वोटों की संख्या पूरी नहीं है। भाजपा के पास 79 विधायक और 3 निर्दलीय समर्थन हैं, यानी कुल 82, जो तीन सांसद चुनने के लिए 8 कम हैं। वहीं बीजेडी के पास 48 विधायक हैं, जिसमें से एक सांसद चुनने के बाद उनके पास 18 वोट बचे, उन्हें दूसरी सीट के लिए 12 और चाहिए और कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं, जबकि सीपीआई(एम) के पास एक विधायक है।

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उम्मीदवारी और समर्थन का समीकरण भी समझिए


ध्यान देने वाली बात यह है कि ओडिशा में बीजेडी ने संत्रुप्त मिश्रा और दत्तेश्वर होटा को उम्मीदवार बनाया है। जहां कांग्रेस ने होटा को समर्थन दिया है। वहीं भाजपा ने अपने उम्मीदवार मनोमहन सामल और सुपजीत कुमार को नामित किया है और निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे का समर्थन किया है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस का होटा को समर्थन देना ओडिशा की राजनीति में महत्वपूर्ण कदम है। बीजेडी और कांग्रेस दोनों मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भाजपा तीन में से तीन सीटें न जीत पाए।



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