उस्मान ख्वाजा और विवादों की पारी:गोल्फ से गाजा तक! पाकिस्तानी मूल के इस क्रिकेटर के वो ‘कांड’ जिनसे मचा भूचाल – Usman Khawaja, Controversies And Double Standards: A Career That Questioned Australian Cricket
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में उस्मान ख्वाजा का नाम सिर्फ शानदार कवर ड्राइव या अहम पारियों के लिए नहीं, बल्कि उन सवालों के लिए भी याद रखा जाएगा, जो उन्होंने सिस्टम, मीडिया और सोच पर उठाए। पाकिस्तान में जन्मे, मुस्लिम पहचान वाले ख्वाजा का करियर जितना क्रिकेटिंग उपलब्धियों से भरा रहा, उतना ही विवादों और बहसों से भी जुड़ा रहा। जनवरी 2026 में उनकी रिटायरमेंट प्रेस कॉन्फ्रेंस ने इन सभी मुद्दों को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को आईना दिखा दिया। ख्वाजा एशेज 2025/26 के पांचवें और आखिरी टेस्ट के बाद रिटायर हो जाएंगे। सिडनी में उनका आखिरी मैच होगा और यह वही मैदान है, जहां से ख्वाजा ने क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी।
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उस्मान ख्वाजा
– फोटो : @cricketcomau
‘हमेशा अलग तरीका का व्यवहार किया गया’
रिटायरमेंट को लेकर एलान के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में ख्वाजा ने खुलकर कहा कि उन्हें अपने पूरे करियर में अलग महसूस कराया गया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, ‘मैं समझता हूं कि ऑस्ट्रेलियाई टीम में जगह बनाना मुश्किल है, लेकिन मेरे साथ जो व्यवहार हुआ, वैसा मैंने किसी और के साथ नहीं देखा।’ उनका कहना था कि उनकी पृष्ठभूमि, पाकिस्तान में जन्म, मुस्लिम पहचान, अक्सर बहस का मुद्दा बना, जबकि प्रदर्शन के लिहाज से वे लगातार टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज रहे। आइए उन विवादों के बारे में जानते हैं, जिनसे ख्वाजा का नाम जुड़ा रहा। इन विवादों ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को भी कटघड़े में खड़ा किया।
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उस्मान ख्वाजा
– फोटो : Twitter
1. पर्थ टेस्ट, गोल्फ और पुरी दुनिया में चर्चा
साल 2025 की एशेज सीरीज शुरू होने को थी। पहला टेस्ट पर्थ में खेला जाना था। मैच शुरू होने से पहले ख्वाजा तीन दिन लगातार गोल्फ खेलते नजर आए। इससे ख्वाजा की पीठ में ऐंठन (बैक स्पैज्म) की खबर आई। इसी दौरान उनकी गोल्फ खेलते तस्वीरें सामने आईं और इसकी वजह से काफी बवाल हुआ। मीडिया में सवाल उठने लगे- क्या वह क्रिकेट को लेकर गंभीर हैं? क्या उनकी कमिटमेंट में कमी है?
ख्वाजा को यही बात सबसे ज्यादा चुभी। उन्होंने शुक्रवार को प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘डोंट गैसलाइट मी। जो मैंने झेला है, उसे नकारा नहीं जा सकता।’ ‘गैसलाइटिंग’ मनोवैज्ञानिक हेरफेर का वह रूप है, जहां कोई व्यक्ति किसी दूसरे को इतना भ्रमित कर देता है कि वह अपनी यादों, समझ और वास्तविकता पर ही शक करने लगता है। हिंदी में इसे भ्रमित करना, धोखे में रखना, या वास्तविकता से भटकाना कह सकते हैं, जिसका उद्देश्य व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर करना होता है। ख्वाजा का आरोप था कि अन्य खिलाड़ियों के साथ ऐसी घटनाओं पर इतनी तीखी प्रतिक्रिया नहीं हुई, जिससे उन्हें नस्लीय स्टीरियोटाइपिंग की बू आने लगी।
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काली पट्टी और जूते पर लिखा मैसेज
– फोटो : Twitter
2. ‘स्वतंत्रता एक मानवाधिकार है’, ICC से टकराव
2023 में इस्राइल और फलस्तीन संघर्ष के दौरान ख्वाजा ने मानवता के पक्ष में आवाज उठाने की कोशिश की। वे ऐसे जूते पहनना चाहते थे, जिन पर लिखा था ‘स्वतंत्रता एक मानव अधिकार है’ और ‘सभी का जीने का समान हक है’। हालांकि, आईसीसी ने इसे राजनीतिक संदेश बताते हुए बैन कर दिया। इसके बाद ख्वाजा ने एमसीजी बॉक्सिंग डे टेस्ट में काली पट्टी बांधकर मैदान में उतरने का फैसला किया। इस पर भी आईसीसी ने उन्हें चार्ज किया। इस मुद्दे पर वेस्टइंडीज के दिग्गज माइकल होल्डिंग ने खुलकर समर्थन किया और कहा कि आईसीसी का रवैया पाखंडी है।
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उस्मान ख्वाजा
– फोटो : PTI
3. पिच पर भी बवाल: पर्थ की सतह पर सवाल
एशेज 2025 के पहले टेस्ट के बाद ख्वाजा ने पर्थ की पिच को लेकर तीखी टिप्पणी की। उनका कहना था कि विकेट जरूरत से ज्यादा तेज गेंदबाजों के अनुकूल है और टेस्ट क्रिकेट के संतुलन के खिलाफ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के कुछ अधिकारी नाराज हुए और ख्वाजा पर निगरानी और बढ़ गई। आलोचकों ने कहा- फिर वही ख्वाजा, फिर वही बयान, जबकि समर्थकों ने इसे सच्चाई बोलने की हिम्मत बताया।