प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को जानकारी दी कि लुधियाना के मशहूर उद्योगपति एस पी ओसवाल से जुड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ और धन शोधन मामले में दूसरी गिरफ्तारी हुई है। जांच एजेंसी ने कानपुर में छापेमारी के बाद 31 दिसंबर को अर्पित राठौर को हिरासत में लिया।
मामले में दूसरा आरोपी गिरफ्तार
जांच में पता चला कि अर्पित राठौर ने न केवल ओसवाल को बल्कि कई अन्य निर्दोष लोगों को भी साइबर ठगी का शिकार बनाया था। तलाशी के दौरान अधिकारियों ने उसके पास से कुछ डिजिटल उपकरण और 14 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं। जालंधर की एक विशेष अदालत ने आरोपी को पांच जनवरी तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले एजेंसी ने 23 दिसंबर को असम से रूमी कलिता को पकड़ा था, जो अभी भी हिरासत में है।
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क्या है मामला?
यह मामला लुधियाना पुलिस की एफआईआर से जुड़ा है। अगस्त 2023 में ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर वर्धमान समूह के चेयरमैन ओसवाल को ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया और उनसे सात करोड़ रुपये ठग लिए थे। ईडी का आरोप है कि राठौर इन अपराधों को अंजाम देने के लिए विदेशी साथियों के संपर्क में था। वह उन्हें ऐसे बैंक खाते उपलब्ध कराता था, जिनका इस्तेमाल अवैध पैसों के लेन-देन के लिए होता है। वह ठगी की रकम को विदेश भेजने में मदद करता था।
आरोपियों ने की घटना को दिया है अंजाम
ईडी ने आरोप लगाया कि, इस काम के बदले वह क्रिप्टोकरेंसी और नकद रुपये लेता था। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने अन्य लोगों से भी 1.73 करोड़ रुपये की ठगी की है। बता दें कि लगातार सामने आ रही इस तरह की घटनाओं के बाद सरकार ने लोगों को जागरूक किया है। वहीं ऐसी स्थिति में लोगों को तुरंत पुलिस या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने की अपील की है।
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