तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चेन्नई-त्रिची नेशनल हाईवे पर हिस्ट्रीशीटर को ले जा रहे पुलिस वाहन पर देशी बमों से हमला किया गया। इस हमले में तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। घटना ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और अपराधियों के बढ़ते हौसले को उजागर कर दिया है।
यह हमला पेरंबलूर जिले में तिरुमंधुरई टोल प्लाजा के पास हुआ। पुलिस के अनुसार, मदुरै का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर ‘वेल्लई’ काली पुलिस कस्टडी में ले जाया जा रहा था। तभी दो कारों में सवार बदमाशों ने पुलिस एस्कॉर्ट वाहन को घेर लिया और उस पर कई देशी बम फेंक दिए। मकसद पुलिस सुरक्षा को तोड़कर आरोपी तक पहुंचना था।
हमले में कौन था निशाना?
‘वेल्लई’ काली कोई साधारण अपराधी नहीं है। उसके खिलाफ 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें नौ हत्याएं शामिल हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि उसे रास्ते में मारने या छुड़ाने की साजिश रची गई थी। हालांकि, पुलिस की सतर्कता से यह मंसूबा नाकाम हो गया।
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पुलिस ने कैसे जवाब दिया?
हमले के दौरान आत्मरक्षा में पुलिसकर्मियों ने फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई के बाद हमलावर मौके से चेन्नई की ओर फरार हो गए। घायल पुलिसकर्मियों को तुरंत पेरंबलूर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों के मुताबिक, सभी घायल खतरे से बाहर हैं और उनका इलाज जारी है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई। नेता प्रतिपक्ष एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पुलिस का डर खत्म हो चुका है और अपराधी बेखौफ हो गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पर तंज कसते हुए कहा कि जब विधानसभा में पीठ थपथपाई जा रही थी, तब सड़कों पर कानून-व्यवस्था बिखर रही थी।
विपक्ष का कहना है कि यह घटना बताती है कि राज्य में अपराधियों का मनोबल कितना बढ़ चुका है। पुलिस वाहन पर खुलेआम बम फेंकना इस बात का संकेत है कि अपराधियों को न कानून का डर है, न प्रशासन का। वहीं, पुलिस का कहना है कि हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं।
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