कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को मोदी सरकार पर गैर भाजपा शासित राज्यों को परेशान करने के लिए राज्यपालों को कठपुतली की तरह इस्तेमाल करने आरोप लगाया। खरगे ने कहा कि अगले आम चुनाव में भाजपा को नहीं रोका गया तो देश में तानाशाही का खतरा बढ़ सकता है। हुबली में एक सभा को संबोधित करते हुए राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे ने कहा, प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय सीधे राज्यपालों को निर्देश देते हैं। राज्यपाल निजी तौर पर यह मानते हैं कि उन्हें ऊपर से निर्देश मिलते हैं।
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लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है- खरगे
उन्होंने आगे कहा, ‘कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में राज्यपाल विधेयकों और अच्छे कामों को मंजूरी नहीं दे रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो रही है। कांग्रेस शासित राज्यों के अलावा दूसरे राज्यों में भी राज्यपाल को कठपुतली की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका मकसद गैर भाजपा शासित राज्यों को परेशान करना है। राज्यपाल राज्यों के काम में लगातार परेशानी खड़ा कर रहे हैं। खरगे ने कहा कि केंद्र ने मनरेगा कानून को खत्म कर दिया। कांग्रेस सरकारों ने अधिकार-आधारित कानून बनाए, जबकि मोदी सरकार ऐसे कानून ला रही है जो लोगों के अधिकार कम करते हैं।’
राहुल गांधी का आरोप- लोकतंत्र का रक्षक नहीं रहा चुनाव आयोग
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भारतीय निर्वाचन आयोग अब लोकतंत्र का रक्षक नहीं रहा, बल्कि वोट चोरी की साजिश का हिस्सा बन गया है। गुजरात में विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर जो प्रक्रिया चलाई जा रही है, वह कोई सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि सुनियोजित, संगठित और रणनीतिक वोट चोरी है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण को ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सांविधानिक अधिकार को कमजोर करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके अनुसार, इसका उद्देश्य यह तय करना है कि सत्ता में कौन आए, न कि जनता की इच्छा का सम्मान करना। उन्होंने दावा किया कि जहां-जहां यह प्रक्रिया लागू की गई, वहां मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने के मामले सामने आए। उन्होंने कहा कि सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हजारों आपत्तियां एक ही नाम से दर्ज की गईं। राहुल गांधी का आरोप है कि कांग्रेस समर्थक खास समुदायों और बूथों को चुनकर निशाना बनाया गया। जहां सत्तारूढ़ दल को हार की आशंका दिखी, वहां मतदाताओं को सूची से ही बाहर कर दिया गया। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यही तरीका पहले आलंद और राजुरा में अपनाया गया था और अब वही खाका गुजरात, राजस्थान तथा अन्य राज्यों में लागू किया जा रहा है, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण थोपा गया है।
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‘आपत्तियों के बाद भी आयोग मूकदर्शक बना रहा’
पार्टी का कहना है कि नियमों के तहत मसौदा मतदाता सूची जारी होने के बाद आपत्तियां मांगी गई थीं और अंतिम तिथि 18 जनवरी थी। 15 जनवरी तक बहुत कम आपत्तियां आईं, लेकिन उसके बाद अचानक लाखों आपत्तियां दर्ज कर दी गईं। कांग्रेस का आरोप है कि 12 लाख आपत्तियों से साफ हो गया कि खास जातियों, समुदायों और क्षेत्रों को निशाना बनाया गया, जबकि आयोग मूकदर्शक बना रहा।
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