नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने अभद्र व्यवहार करने वाले यात्रियों से निपटने के लिए सख्त नियमों का प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें विमानन कंपनियों को ऐसे यात्रियों पर 30 दिन तक के लिए उड़ान प्रतिबंध लगाने की अनुमति देना भी शामिल है। विमानन नियामक ने संशोधित मसौदा नियमावली में कहा कि विमान/व्यक्तियों/संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उड़ानों में अनुशासन बनाए रखने के लिए ‘कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति’’ अपनाई गई है।
डीजीसीए ने कहा कि विमान, यात्रियों और संपत्ति की सुरक्षा के लिए नो/जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। प्रस्ताव के अनुसार, हर एयरलाइन को बदसलूकी की घटनाओं से निपटने और उनकी रिपोर्टिंग के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाना होगा। हालांकि, आमतौर पर एक स्वतंत्र समिति, जिसमें दूसरी एयरलाइन का प्रतिनिधि भी शामिल होगा, उड़ान प्रतिबंध पर फैसला करेगी। लेकिन कुछ गंभीर मामलों में एयरलाइन सीधे 30 दिन का बैन लगा सकेगी।
ड्रॉफ्ट पर 16 मार्च तक सुझाव मांगे
नए प्रावधानों को लेकर जारी ड्रॉफ्ट पर 16 मार्च तक संबंधित पक्षों और लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी के तहत जारी प्रावधानों के हिसाब से अनुशासनहीनता में चालक दल से बदसलूकी, शराब के नशे में हंगामा, मारपीट, नियमों का उल्लंघन, नारेबाजी और सुरक्षा में बाधा डालना शामिल है।
इसके अलावा इमरजेंसी एग्जिट से छेड़छाड़ या लाइफ जैकेट जैसे सुरक्षा उपकरणों का गलत इस्तेमाल शामिल है। मौजूदा नियमों के तहत समिति के फैसले तक 45 दिन का अस्थायी बैन लगाया जा सकता है, जो नए प्रस्ताव में भी जारी रहेगा। अपराध की गंभीरता के आधार पर तीन महीने से लेकर दो साल या उससे अधिक समय तक प्रतिबंध लगाया जा सकता है। डीजीसीए ने अनुशासनहीन यात्रियों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया है।
- श्रेणी 1: मौखिक दुर्व्यवहार- अधिकतम 3 महीने का प्रतिबंध
- श्रेणी 2: शारीरिक हिंसा- अधिकतम 6 महीने का प्रतिबंध
- श्रेणी 3: जानलेवा हरकतें – 2 साल या उससे अधिक का प्रतिबंध संभव
- श्रेणी 4: कॉकपिट में घुसने की कोशिश जैसे गंभीर मामले- 2 साल या उससे अधिक का प्रतिबंध संभव
हर श्रेणी के अनुसार उड़ान पर अलग-अलग अवधि का प्रतिबंध लगाया जाएगा। दोषी यात्रियों को नो-फ्लाई लिस्ट में डाला जा सकता है। ड्राफ्ट नियमों के तहत एयरलाइंस को ऐसे यात्रियों का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। यह रिकॉर्ड डीजीसीए के साथ साझा किया जाएगा। हालांकि संबंधित जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। डीजीसीए का मानना है कि इन नियमों का उद्देश्य यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और हवाई यात्रा को सुरक्षित व सुविधाजनक बनाना है।
रिकॉर्ड में शामिल होंगे: नाम, संपर्क विवरण, पहचान पत्र, घटना का विवरण और प्रतिबंध अवधि।
बनेगी तीन सदस्यीय समिति
नए प्रावधान के तहत तीन सदस्यों की एक समिति बनाई जाएगी। सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (अध्यक्ष) एयरलाइंस के प्रतिनिधि (सदस्य) और उपभोक्ता संगठन/यात्री संघ के प्रतिनिधि या सेवानिवृत्त अधिकारी (सदस्य) शामिल होंगे। यात्री को अधिकार होगा कि वह नोटिस प्राप्त होने की स्थिति में 60 दिन के अंदर समिति के समक्ष अपील कर सकता है।