Amit Shah:’नक्सलवाद खत्म, आदिवासियों को मिला असली न्याय’; लोकसभा में नक्सलवाद पर बोले अमित शाह – Amit Shah Naxalism Speech Lok Sabha Red Corridor India States Naxal Issue Modi Government Congress Failure


लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि देश में नक्सलवाद अब लगभग समाप्त हो चुका है और आदिवासी इलाकों में असली न्याय पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि 2014 के बाद केंद्र सरकार की सख्त नीति, सुरक्षा अभियान और विकास योजनाओं के कारण संभव हुआ है। शाह ने विपक्ष खासकर कांग्रेस पर भी जमकर हमला बोला।


उन्होंने साफ कहा कि सरकार ने नक्सलियों से बातचीत नहीं, बल्कि उन्हें खत्म कर विकास को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि जो हथियार उठाएगा, उसे कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि नक्सलियों का पूरा केंद्रीय नेतृत्व, पोलित ब्यूरो और कमेटी अब खत्म हो चुकी है। कई मारे गए, कई ने सरेंडर किया और कुछ फरार हैं।


क्या नक्सलवाद सच में खत्म हो गया?

शाह ने कहा कि देश अब नक्सलमुक्त होने की स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि कई बड़े ऑपरेशन जैसे बुढ़ा, थंडरस्टॉर्म और ब्लैक फॉरेस्ट चलाए गए, जिनमें भारी मात्रा में हथियार, आईईडी फैक्ट्री और अनाज बरामद हुआ। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा के बड़े इलाके अब नक्सल प्रभाव से बाहर आ चुके हैं। सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस की भूमिका को उन्होंने अहम बताया।

‘भोले आदिवासियों को बहकाकर हथियार थमाए गए’

आजादी के समय देश संसाधनों की कमी और विकास की चुनौतियों से जूझ रहा था। कई दूर-दराज के इलाकों तक सरकार की पहुंच नहीं थी, सड़कों और सुविधाओं का अभाव था। ऐसे हालात में कुछ संगठनों ने इन कमजोरियों का फायदा उठाया। जहां राज्य की पकड़ कम थी, उन्हीं इलाकों को रेड कॉरिडोर बनाया गया। भोले-भाले आदिवासियों को भेदभाव और शोषण के नाम पर भड़काया गया और उनके हाथों में हथियार थमा दिए गए। हकीकत यह है कि इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध भेदभाव नहीं, बल्कि विकास की कमी थी, जिसका इस्तेमाल कर हिंसा को बढ़ावा दिया गया।

शाह ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?

गृह मंत्री ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के समय नक्सलवाद को बढ़ावा मिला। उन्होंने एनएसी, कुछ नेताओं और कथित नक्सल समर्थकों के संबंधों का जिक्र किया। शाह ने कहा कि यह मुद्दा यहीं नहीं रुकेगा और चुनाव तक जाएगा। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर भी सवाल उठाए और कहा कि देश को जवाब देना होगा कि नक्सलवाद के दौर में क्या हुआ।


सरकार ने क्या रणनीति अपनाई?

शाह ने बताया कि सरकार ने ऑल एजेंसी अप्रोच अपनाई, जिसमें सीएपीएफ, राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाया गया। फंडिंग और सपोर्ट सिस्टम पर प्रहार किया गया। सरेंडर नीति लागू की गई, जिसमें आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक मदद और पुनर्वास दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने हर गांव तक अपनी पहुंच बनाई, जिससे नक्सलवाद कमजोर हुआ।

उन्होंने आगे कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विकास हुआ। हजारों किलोमीटर सड़कें बनीं, मोबाइल टावर लगाए गए, बैंक, एटीएम और डाकघर खोले गए। शिक्षा के लिए एकलव्य स्कूल, आईटीआई और कौशल केंद्र बनाए गए। उन्होंने कहा कि विकास ही नक्सलवाद खत्म करने का सबसे बड़ा कारण बना।

नक्सलवाद की जड़ क्या थी?

शाह ने कहा कि नक्सलवाद गरीबी से नहीं, बल्कि विचारधारा से पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि यह विचारधारा लोकतंत्र में विश्वास नहीं करती और बंदूक के जरिए सत्ता चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासियों को बरगलाकर उनके हाथ में हथियार दिए गए और विकास को रोका गया।


गृह मंत्री ने कहा कि सरकार आगे भी सख्ती और विकास दोनों पर काम जारी रखेगी। उन्होंने आदिवासी समाज को भरोसा दिलाया कि उनकी सुरक्षा और विकास सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अब देश बंदूक से नहीं, संविधान से चलेगा और यही असली जीत है।

राहुल गांधी पर भी बोला हमला

संसद में शाह ने कहा कि राहुल गांधी अपने लंबे करियर में नक्सलों और नक्सल समर्थकों के साथ देखे गए हैं। भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंट जुड़े थे, इसके रिकॉर्ड मौजूद हैं। 2018 में हैदराबाद में घुमांडी विट्ठल राव, राहुल ने उस गद्दार से मुलाकात की। 2025 कॉर्डिनेशन कमेटी ऑफ पीस के साथ मुलाकात की। हिडमा जब मारा गया, तब इंडिया गेट पर कितने हिडमा मारोगे, हर घर से हिडमा निकलेगा के नारे लगे। इन नारों के वीडियो को राहुल गांधी ने खुद पोस्ट किया है। नक्सलों का समर्थन करते-करते एक पार्टी और उसके नेता खुद नक्सलवादी बन गए हैं।

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