क्या आपने कभी सुना है कि हलवा खाने के तुरंत बाद 100 से ज्यादा लोगों को एक बेसमेंट में बंद कर दिया जाए? सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी लगती है, लेकिन वित्त मंत्रालय में बजट तैयार होने यानी उसकी छपाई से ठीक पहले ठीक यही होता है। यह सिर्फ एक ‘मीठी रस्म’ नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े ‘सीक्रेट मिशन’ यानी बजट की प्रक्रिया का हिस्सा है। बजट तैयार होने की प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले एक हलवा सेरेमनी होती है, उसके बाद इसे तैयार करने वाले सभी अधिकारी और कर्मचारी ‘लॉक इन’ हो जाते हैं। उसका संपर्क दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट जाता है।
क्या है यह ‘हलवा सेरेमनी’?
भारत में हर अच्छे काम की शुरुआत मीठे से करने की परंपरा है। यही कारण है कि संसद में बजट पेश होने (1 फरवरी) से कुछ दिन पहले वित्त मंत्रालय में एक बड़ी कड़ाही में हलवा बनाया जाता है। परंपरा के मुताबिक, वित्त मंत्री खुद कड़ाही में हलवा तैयार करवाती हैं और अपने अधिकारियों को परोसती हैं। यह उन अधिकारियों की मेहनत का सम्मान है जो बजट तैयार करने के लिए अपना दिन-रात एक कर देते हैं। लेकिन असली कहानी हलवा की मिठास के बाद शुरू होती है…
बजट के पहले लॉक इन के दौरान क्या होता है?
हलवा सेरेमनी का रस्म खत्म होते ही बजट प्रक्रिया का ‘लॉक-इन पीरियड’ शुरू हो जाता है। नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में स्थित प्रिंटिंग प्रेस में 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी ‘लॉक’ हो जाते हैं।
- नो मोबाइल, नो इंटरनेट: अंदर जाने के बाद किसी को भी बाहर आने की इजाजत नहीं होती। मोबाइल फोन पूरी तरह बैन होते हैं।
- जासूसी निगरानी: वहां सिर्फ लैंडलाइन फोन होते हैं, जिन पर आने-जाने वाली हर कॉल को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) सुनता है।
- परिवार से दूरी: अधिकारी अपने परिवार से भी बात नहीं कर सकते। यहां तक कि मेडिकल इमरजेंसी में भी डॉक्टर अंदर ही आते हैं, कोई बाहर नहीं जाता।