Export Promotion:सरकार का बड़ा फैसला, निर्यातकों के लिए ₹7,295 करोड़ के पैकेज का एलान; एमएसएमई को सस्ता कर्ज – Export Promotion Package Govt Decision 7295 Crore Package Msme Cheap Loan


वैश्विक व्यापार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार ने शुक्रवार को 7,295 करोड़ रुपये के एक व्यापक ‘एक्सपोर्ट सपोर्ट पैकेज’ की घोषणा की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य निर्यातकों, विशेषकर एमएसएमई सेक्टर के लिए कर्ज (क्रेडिट) की उपलब्धता को आसान और किफायती बनाना है।

यह योजना अगले वर्षों (2025-31) के लिए लागू की जाएगी। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, इस पैकेज के जरिए निर्यातकों की ‘ट्रेड फाइनेंस’ यानी व्यापार के लिए पूंजी से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। सरकार की ओर से घोषित इस 7,295 करोड़ रुपये के पैकेज को दो मुख्य भागों में बांटा गया है। इसका पहला हिस्सा है ब्याज सहायता योजना। इसके लिए 5,181 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। दूसरा भाग है कोलेटरल सपोर्ट। इसके लिए 2,114 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

सस्ता कर्ज और क्रेडिट गारंटी: क्या है खास?

ब्याज सहायता योजना के तहत, पात्र एमएसएमई निर्यातकों को प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट एक्सपोर्ट क्रेडिट पर सब्सिडी मिलेगी। सरकार ने इसके तहत 2.75 प्रतिशत तक की सब्सिडी का लाभ देने का फैसला किया है। हालांकि, प्रति फर्म सालाना लाभ की सीमा 50 लाख रुपये तय की गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक व्यापार चुनौतियों का सामना कर रहा है, ताकि भारतीय निर्यातक प्रतिस्पर्धी दरों पर रुपये में कर्ज प्राप्त कर सकें।

वहीं, 2,114 करोड़ रुपये के कोलेटरल सपोर्ट के तहत निर्यात से जुड़े वर्किंग कैपिटल लोन (कार्यशील पूंजी ऋण) के लिए क्रेडिट गारंटी दी जाएगी। इसके तहत प्रति फर्म 10 करोड़ रुपये तक की कोलेटरल गारंटी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे निर्यातकों को बिना अतिरिक्त संपत्ति गिरवी रखे कर्ज लेने में मदद मिलेगी।

नवंबर 2025 के ‘मिशन’ का हिस्सा

यह घोषणा नवंबर 2025 में सरकार द्वारा मंजूर किए गए 25,060 करोड़ रुपये के महत्वाकांक्षी ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ (EPM) का दूसरा प्रमुख घटक है। इससे पहले, 31 दिसंबर 2025 को इस मिशन का पहला हिस्सा- 4,531 करोड़ रुपये का ‘मार्केट एक्सेस सपोर्ट’- लॉन्च किया गया था।

किन उत्पादों को मिलेगा लाभ?

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के अनुसार, ब्याज सहायता और कोलेटरल सपोर्ट का लाभ केवल उत्पादों की एक चयनित ‘पॉजिटिव लिस्ट’ पर ही लागू होगा। रक्षा उत्पाद और SCOMET (विशेष रसायन, जीव, सामग्री, उपकरण और प्रौद्योगिकियां) आइटम इस योजना के दायरे में आएंगे। प्रतिबंधित वस्तुएं, वेस्ट और स्क्रैप, और पीएलआई योजना के तहत लाभान्वित होने वाले उत्पाद इन उपायों के दायरे से बाहर रहेंगे। वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अजय भादू ने बताया कि ये हस्तक्षेप निर्यातकों की वित्तीय बाधाओं को दूर करेंगे। योजना के विस्तृत दिशानिर्देश जल्द ही भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और डीजीएफटी की ओर से जारी किए जाएंगे। आरबीआई इस योजना की कार्यान्वयन एजेंसी होगी।



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