अमेरिका ने अपना बड़ा युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके साथ तीन युद्धपोत (डिस्ट्रॉयर) पश्चिम एशिया भेज दिए हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत बढ़ गया है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के मुताबिक यह जहाजों का समूह अभी हिंद महासागर में है, ईरान के पास वाले अरब सागर में नहीं। लेकिन इसके आने से इलाके में हजारों अमेरिकी सैनिक और सैन्य ताकत बढ़ गई है।
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एहतियात के तौर पर भेजा गया बेड़ा- ट्रंप
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह बेड़ा ‘एहतियात के तौर पर’ भेजा गया है। उन्होंने कहा, ‘हमारी बहुत बड़ी फौज उस तरफ जा रही है, हो सकता है हमें इस्तेमाल न करना पड़े।’ दरअसल, ईरान में दिसंबर से सरकार के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने इन प्रदर्शनों को कुचलने के लिए हजारों लोगों को मार दिया और गिरफ्तार किया। समाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, लगभग 5973 लोग मारे गए और 41800 से ज्यादा गिरफ्तार हुए हैं। वहीं ईरानी सरकार मानती है कि इन प्रदर्शनों में 3117 मौतें हुई हैं।
ट्रंप ने पिछली बार से बड़े हमले की दी चेतावनी
इससे पहले ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी दी, तो अमेरिका सैन्य हमला कर सकता है। हाल ही में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने 800 कैदियों को फांसी देना रोक दिया है, लेकिन ईरान के शीर्ष अभियोजक ने इसे झूठ बताया। इसके बावजूद ट्रंप ने कहा कि अगर फांसी दी गई तो अमेरिका का हमला इतना बड़ा होगा कि ‘पिछले साल ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमले छोटे लगेंगे।’
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एफ-15ई लड़ाकू विमान भी क्षेत्र में मौजूद
इसके अलावा अमेरिका ने एफ-15ई लड़ाकू विमान भी इलाके में भेज दिए हैं। इसके साथ ही दर्जनों सैन्य मालवाहक विमान भी पश्चिम एशिया की तरफ जाते देखे गए हैं। पिछले साल भी इसी तरह अमेरिका ने तैयारी की थी, जब उसने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था और जवाब में ईरान ने कतर के अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइलें दागी थीं।