इस्राइल में अमेरिका के राजदूत माइक हुकाबी के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। हुकाबी ने एक इंटरव्यू में कहा कि इस्राइल को मध्य पूर्व के बड़े हिस्से पर अधिकार हो सकता है। उन्होंने यह टिप्पणी अमेरिकी रूढ़िवादी कमेंटेटर टकर कार्लसन को दिए इंटरव्यू में की।
कार्लसन ने बाइबिल के संदर्भ में पूछा था कि क्या इस्राइल को उस भूभाग पर अधिकार है, जो आज पूरे मिडिल ईस्ट के बड़े हिस्से में फैला है। इस पर हुकाबी ने कहा अगर वे सब ले लें तो भी ठीक होगा। हालांकि बाद में उन्होंने जोड़ा कि इस्राइल फिलहाल अपने क्षेत्र का विस्तार नहीं चाहता और उसे अपने वैध क्षेत्र में सुरक्षा का अधिकार है।
अरब और मुस्लिम देशों की कड़ी प्रतिक्रिया
हुकाबी के बयान के बाद सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन, इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और अरब लीग (League of Arab States) ने कड़ी आपत्ति जताई। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इसे अत्यधिक उग्र और अस्वीकार्य बयानबाजी बताया और अमेरिकी विदेश विभाग से स्पष्टीकरण की मांग की। मिस्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन कहा और दोहराया कि इस्राइल का कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्रों या अन्य अरब भूमि पर कोई संप्रभु अधिकार नहीं है। अरब लीग ने कहा कि ऐसे बयान क्षेत्र में धार्मिक और राष्ट्रीय भावनाओं को भड़काने का काम करते हैं।
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सीमाएं और संघर्ष का इतिहास
1948 में स्थापना के बाद से इस्राइल की सीमाएं कई युद्धों, संघर्ष विराम समझौतों और शांति संधियों के चलते बदलती रही हैं। 1967 के छह-दिवसीय युद्ध में इस्राइल ने वेस्ट बैंक, पूर्वी यरुशलम, गाजा, सिनाई प्रायद्वीप और गोलान हाइट्स पर कब्जा किया था। बाद में मिस्र के साथ शांति समझौते के तहत सिनाई खाली किया गया और 2005 में गाजा से एकतरफा वापसी की गई।
हाल के महीनों में इस्राइल ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार और प्रशासनिक बदलावों के जरिए नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह वेस्ट बैंक के औपचारिक विलय की अनुमति नहीं देंगे। फलस्तीनी दशकों से वेस्ट बैंक और गाजा में पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र राज्य की मांग कर रहे हैं, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का व्यापक समर्थन प्राप्त है। हुकाबी पहले भी दो-राष्ट्र समाधान का विरोध करते रहे हैं।