Op Sindoor पर विदेशी थिंक टैंक:वायुसेना की कार्रवाई से पस्त हो गया था पाकिस्तान, लगाई थी संघर्षविराम की गुहार – Swiss Think Tank Centre For Military History And Perspective Studies Chpm Report Op Sindoor Pakistan Airspace


जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 बेकसूर नागरिकों की हत्या की थी, जिसके जवाब में भारतीय सेनाओं (थलसेना, वायुसेना, नौसेना) ने संयुक्त रूप से पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। जिस पर अब विदेशी थिंक टैंक ने अपनी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे सैन्य कार्रवाई के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान की हवाई रक्षा प्रणाली को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। जिससे चलते 4 दिनों के संघर्ष के बाद ही पाकिस्तान ने युद्धविराम की गुहार लगाई। 

सीएचपीएम की रिपोर्ट में क्या बताया?

स्विट्जरलैंड स्थित सेंटर फॉर मिलिट्री हिस्ट्री एंड पर्सपेक्टिव स्टडीज (सीएचपीएम) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 मई, 2025 की सुबह तक भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के अहम हिस्सों पर हवाई श्रेष्ठता यानी अपना वर्चस्व हासिल कर लिया था। जिससे दुश्मन के ठिकानों के खिलाफ लंबी दूरी के सटीक हमले करने की अनुमति मिल गई थी। जिसके चलते पाकिस्तान घुटना पर आ गया और दुश्मन के हौंसले पलभर में ही पस्त हो गए।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर सबसे विस्तृत स्वतंत्र विश्लेषण

सीएचपीएम की नई रिपोर्ट में सैन्य इतिहासकार एड्रियन फोंटानेलाज ने 7 से 10 मई 2025 के बीच भारत-पाकिस्तान हवाई युद्ध का अब तक का सबसे विस्तृत स्वतंत्र विश्लेषण किया है।फोंटानेलाज द्वारा लिखित रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत की दूरस्थ हमलों को जारी रखने की क्षमता काफी हद तक ब्रह्मोस और स्कैल्प-ईजी क्रूज मिसाइलों जैसे उन्नत गोला-बारूद की उपलब्धता पर निर्भर करती है।

पाकिस्तानी वायु सेना घुटनों पर आई

इसके विपरीत 7 मई को सफलतापूर्वक अंजाम दिए गए जटिल हवाई अभियानों को दोहराने की पाकिस्तानी वायु सेना (पीएएफ) की क्षमता धीरे-धीरे कम होती गई। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अग्रिम हवाई निगरानी रडार नष्ट हो गए थे और भारत की एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों से पाकिस्तानी वायु सेना के एयरवेज सिस्टम (एडब्ल्यूएसी) और स्टैंडऑफ स्ट्राइक प्लेटफॉर्म को खतरा बढ़ता जा रहा था। क्योंकि 7 से 10 मई के बीच किए गए पाकिस्तानी हमलों को भारतीय रक्षा प्रणालियों ने काफी हद तक नाकाम कर दिया था।

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सटीक निशाना और सबकुछ तबाह 

सीएचपीएम की रिपोर्ट में बताया गया है कि 7 मई को राफेल या मिराज 2000I लड़ाकू विमानों से युक्त दो भारतीय आक्रमण इकाइयों में से एक ने बेहद कम ऊंचाई पर पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया और फिर अचानक ऊपर उठकर सटीक बम गिराए। विमानों ने बमों से तब तक हमला करना जारी रखा, जब तक कि वे लक्ष्य पर नहीं गिरे। इधर 7 मई की सुबह ही पाकिस्तानी तोपखाने ने नियंत्रण रेखा के पास गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में भारत ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। उसी रात, पाकिस्तानी वायु सेना ने 300 से अधिक ड्रोन, जेएफ-17 लड़ाकू विमानों और सीएम-400एकेजी मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुए एक व्यापक आक्रमण शुरू किया।

सैन्य एवं नागरिक ठिकानों को बनाया निशाना

ड्रोन हमलों में भारतीय सेना की अग्रिम चौकियों, कमान मुख्यालयों, रसद केंद्रों और हवाई अड्डों को निशाना बनाया गया, साथ ही इलेक्ट्रॉनिक खुफिया जानकारी जुटाने के लिए भारतीय वायु रक्षा रडारों को सक्रिय करने का भी प्रयास किया गया। पाकिस्तानी सेना ने सोंगर सशस्त्र ड्रोन, यिहा-III (तुर्की निर्मित) आत्मघाती ड्रोन का इस्तेमाल किया और सैन्य एवं नागरिक ठिकानों पर हमले किए। 

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भारतीय हवाई सुरक्षा को भेदने में फेल रहा PAK

हमले की व्यापकता के बावजूद रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान भारतीय हवाई सुरक्षा को भेदने में विफल रहा। अधिकांश आने वाले गोला-बारूद को रोक दिया गया। 9 मई को एक और पाकिस्तानी हमले की तैयारियों का पता चलने पर भारत ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। 10 मई को सुबह 2:00 बजे से 5:00 बजे के बीच भारतीय वायु सेना ने Su-30MKI, जगुआर और राफेल विमानों का इस्तेमाल करते हुए भारतीय हवाई क्षेत्र के भीतर से ब्रह्मोस, SCALP-EG और रैम्पेज मिसाइलें दागीं।

पाकिस्तान के हवाई अड्डों को बनाया निशाना

पाकिस्तान के भीतर 200 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित सात ठिकानों पर हमले किए गए, जिनमें सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बैटरी और पांच हवाई अड्डे शामिल थे। इस्लामाबाद के पास स्थित नूर खान हवाई अड्डे के कमान एवं नियंत्रण केंद्र को नुकसान पहुंचा, जबकि पाकिस्तान के MALE ड्रोन बेड़े का केंद्र मुरीद हवाई अड्डे पर ड्रोन हैंगर और नियंत्रण सुविधाओं को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि रहीम यार खान, रफीकी और सुक्कुर हवाई अड्डों को भी निशाना बनाया गया।

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स्विस रिपोर्ट के अनुसार भारत पर पाकिस्तानी जवाबी कार्रवाई के प्रयासों पूरी तरह से विफल रहे। 7 मई को शुरू हुए टकराव में 10 मई तक स्थिति साफतौर से बदल चुकी थी। पाकिस्तान किसी भी तरह से भारत से संघर्ष की स्थिति में नहीं था। ऐसे में स्विस विश्लेषकों का निष्कर्ष है कि इसी बिंदु पर पाकिस्तान ने युद्धविराम की मांग की।

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