शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ माघ मेले में हुए विवाद के बीच बाबा रामदेव ने कहा है कि सनातनी आपस में ही लड़ने में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पहले से ही बहुत भारत विरोधी और सनातन विरोधी दुश्मन हैं और संतों को आपस में नहीं लड़ना चाहिए। गोवा में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे बाबा रामदेव ने मीडिया से बात करते हुए ये बात कही।
विवाद के बीच क्या-क्या बोले रामदेव?
- बाबा रामदेव ने कहा, ‘गायों को बचाना सभी हिंदुओं की साझा जिम्मेदारी है। गायों को सिर्फ नारेबाजी से नहीं बचाया जा सकता।
- सभी संतों को 5-10 हजार गायों को पालना चाहिए। गायों को तभी बचाया जा सकता है, जब हम उनकी देखभाल करें। पतंजलि पीठ एक लाख गायों की देखभाल कर रही है। शंकराचार्यों को भी अपने आश्रम में गायों की देखभाल करनी चाहिए।
- सनातनी आपस में ही लड़ने में व्यस्त हैं। हमारे पहले से ही भारत विरोध, सनातन विरोधी दुश्मन हैं।
- ये देश विरोधी तत्व पीएम मोदी और अमित शाह को नुकसान पहुंचाने के लिए सबकुछ कर रहे हैं।
- ऐसे में हमारे संतों को भी हमारे नेताओं के खिलाफ मन में नाराजगी नहीं रखनी चाहिए।’
#WATCH | Panaji, Goa | Yog Guru Swami Ramdev says, “Protecting the cow is a collective responsibility of all the Hindus. Cows will not be protected by just attending conferences and raising slogans. All saints and seers must domesticate at least 5000-10000 cows… Cows will be… pic.twitter.com/cteKZreF1G
— ANI (@ANI) January 24, 2026
माघ मेले में भी बाबा रामदेव ने इस विवाद पर दिया बयान
इससे पहले बाबा रामदेव शुक्रवार को प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में संगम में स्नान करने पहुंचे। वहां भी बाबा रामदेव ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ माघ मेले में हुई बदसलूकी और शंकराचार्य के विरोध पर अपनी बात रखी। बाबा रामदेव ने घटना को गलत बताया और कहा कि ऐसा व्यवहार किसी के साथ भी नहीं किया जाना चाहिए। बाबा रामदेव ने कहा, ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे अपने योगियों और पूजनीय संतों को भी अपमानजनक या अपशब्दों का सामना करना पड़ता है। ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है, न केवल शंकराचार्य के लिए, बल्कि किसी भी साधु के लिए। हर आदमी को अपने गौरव और गरिमा का ध्यान खुद रखना चाहिए।
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बाबा रामदेव ने कहा कि शंकराचार्य जी को हम भगवान शंकर का विग्रहमान स्वरूप मानते हैं तो शंकराचार्य जी की तरफ से कोई विवाद न हो ऐसी हम अपेक्षा करते हैं। साधु हैं वो विवाद किस बात का, कम से कम किसी धर्मस्थान पर तो विवाद नहीं होना चाहिए, तीर्थ में किस बात का विवाद? न यहां कोई स्नान का विवाद होना चाहिए, न कोई पालकी का विवाद होना चाहिए। वो साधु क्या जो अहंकार करे, साधु बनता ही वो है जिसने अपने अभिमान को मिटा दिया है। कोई देश का इस्लामीकरण करना चाहता है, कोई ईसाईकरण करना चाहता है, कोई गजवा ए हिन्द बनाना चाहता है तो सनातन के शत्रु तो बाहर ही बहुत हैं तो कम से कम हम आपस में न लड़ें।