ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात को लेकर अमेरिका ने एक बार फिर कड़ा कदम उठाया है। नए आदेश के तहत कई कंपनियों, जहाजों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। इस कार्रवाई में एक भारतीय कंपनी और उसके निदेशक का नाम भी शामिल है। अमेरिका का कहना है कि ईरान से जुड़े तेल कारोबार के जरिए नियमों को दरकिनार किया जा रहा था। इसी आधार पर यह सख्ती की गई है।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिका ने घोषणा की है कि ईरान के पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पाद और पेट्रोकेमिकल्स के कथित अवैध निर्यात से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई की जा रही है। इस चरण में 15 संस्थाओं, दो व्यक्तियों और 14 जहाजों को प्रतिबंध सूची में डाला गया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ये संस्थाएं ईरान के तेल निर्यात को जारी रखने में मदद कर रही थीं। नए प्रतिबंधों के बाद इनसे जुड़े लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर रोक लगेगी।
भारतीय कंपनी पर क्या आरोप?
- भारत की एलिवेट मरीन मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड पर ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई का आरोप है।
- कंपनी ने सितंबर से नवंबर 2025 के बीच तीन बार तेल उत्पादों का ट्रांसपोर्ट किया।
- यह ढुलाई ईरान से जुड़े पेट्रोलियम उत्पादों की बताई गई है।
- कंपनी के निदेशक आकाश अनंत शिंदे का नाम भी प्रतिबंध सूची में डाला गया है।
- अमेरिकी प्रतिबंध के बाद कंपनी के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और कारोबारी लेनदेन प्रभावित हो सकते हैं।
अमेरिका ने सख्ती की वजह क्या बताई?
अमेरिका का कहना है कि ईरान तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने, दमनकारी गतिविधियों और आतंक से जुड़े समूहों को समर्थन देने में करता है। इसी आधार पर यह कार्रवाई जरूरी बताई गई है। बयान में कहा गया है कि जब तक ईरान प्रतिबंधों से बचने के रास्ते तलाशता रहेगा और ऐसे नेटवर्क काम करते रहेंगे, तब तक उनसे जुड़े साझेदारों और संस्थाओं पर कार्रवाई जारी रहेगी।
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अन्य लोगों और नेटवर्क पर भी कार्रवाई
इस कार्रवाई के साथ अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े लोगों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। एक बड़े निवेशक बाबाक मोर्तजा जंजानी को भी सूची में डाला गया है। अमेरिका का लक्ष्य उन पूरे नेटवर्क को तोड़ना बताया गया है, जो ईरान के तेल निर्यात को अप्रत्यक्ष रास्तों से जारी रखने में मदद कर रहे हैं।
ईरान का जवाब और आगे की बातचीत
दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका के साथ हाल की बातचीत में ईरान ने अपना पक्ष साफ रखा है। उन्होंने कहा कि बातचीत की शुरुआत सकारात्मक रही है और आगे भी चर्चा जारी रखने पर सहमति बनी है। हालांकि प्रतिबंधों के नए दौर से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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